Day: April 4, 2021

रात भर न सोया

बंद दरवाजें , खिड़कियों के पीछे वो रात भर रोयाचीखता रहा घुटन में पर रात भर न सोया अरे कोई है क्या मेरे साथ भी कोई रख दे मेरे सर पे हाथ भीकोई तो सुन ले मेरी खामोश सी चीखों कोकोई तो समझे  मैंने कितना है  खोया अरे अकेला हूँ इन दीवारों के बीचकिसको गले …

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पर न होगा बिताने को कोई

याद नहीं कोई मुलाकात अपनीयाद नहीं कोई बात अपनी याद है तो बस इतना की मिले थे चंद अफ़सानो के बीचदोस्तों और कुछ बैगानो के बीच मिले तो जाना अल्फाज एक जैसे ही थेअल्हड थे हम ,तुम भी कुछ वैसे ही थे न अल्फ हमको समझते थे ,न तारीफ़ तुमको याद थीबेवजह को बातों में …

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चीखों के पीछे सन्नाटे भाग रहे है

रात कह रही है सो जाओ अँधेरे जाग रहे है चीखों के पीछे सन्नाटे भाग रहे है तुम जगना नहीं किसी आवाज पर गैर कर देना लगे कोई परिहास अगर वो शर्म को बांधे नज़र में ख़ामोशी त्याग रहे है चीखों के पीछे सन्नाटे भाग रहे है उसे इल्म है अपने आघात का कौन उठाये बोझ विश्वास का बीहड़ की ओट में छिपकर दहलीज लिहाज की लांघ रहे है चीखों के पीछे सन्नाटे भाग रहे है साक्षी –पुणे

बात कौन करें

बात यही है जानब की पहले बात कौन करें बातों से पहले की मुलाकात कौन करें  वो जो गुजरे बिना उनके , और उनके इंतजार में उन तनहा चाँद लम्हों का हिसाब कौन करें  साक्षी –पुणे

रचनाकारजीत गया।

सुबह-सुबह,जब सब शुरू कररहे थे…अपने-अपने काम!!वो भी उठा..औरलग गयाअपने काम में…वोभागने लगा…और,,तेज़ी सेभागता रहा!!कभी आँगनमें,दौड़ती धूप के पीछे!!कभी खिड़की पे फुदकती,चिड़िया के पीछे!!कभी, खेत में नाचती,लहराती, सरसों को पकड़ने!!कभी, गुनगुनाती,बलखाती, नदी को जकड़ने!!कभी,गरजते, घुमड़ते बादल को थामने!!या, इंद्रधनुष पर कोई डोरीबांधने!!कभी,क्षितिज की दूरी नापने! या,अनगिन तारों की संख्या भाँपने!!कभी,चमकते, चढ़ते चाँद कोरोकने!! या,जल्दी में चलती …

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