आज एक अभीराम हूँ

में श्वेत से उठती चली अब रंग का आवास हूँमें देह तपन न अविलास वाशी ,मुक्त मोह विश्वास हूँ हूँ में मत अपना ही एक ,आवाम हूँ आगाज हूँमें रचियता देह की ,में विमुख अंजाम हूँ सति नहीं शंका नहीं ,संगर्ष पग पग परिणाम हूँपावक मृदु सी जलती नहीं, अब निर्लज आवाम हूँ अहद उठ खड़ी …

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